Why on Road Safety(Hindi)

Why to work on Road Safety !

हमारे देश में सडक दुर्घटनाओं में हर साल लगभग 1,50,000 व्यक्ति काल का ग्रास बन जाते हैं और लगभग 2,50,000 व्यक्ति अपंग हो जाते हैं। सडक दुर्घटनाओं में प्रतिवर्ष देश की GDP का 3 प्रतिषत अर्थात् लगभग रू. 55000 करोड  का भारतीय अर्थव्यवस्था को नुकसान होता है।

स्थिति बडी भयावह है । किसी भी युद्ध अथवा महामारी से भी अधिक जन-धन का नुकसान प्रतिवर्ष हमें सहना पड रहा है । संपूर्ण स्थिति का आंकलन और भी भयावह है । इन दुर्घटनाओं के कारण हर वर्ष लगभग 2,00,000 परिवार बेसहारा हो जाते हैं क्योंकि मरने वाले व अपंग होने वाले लोगों में 15 से 35 वर्ष की उम्र के लोगों की संख्या ही अधिक है, जो अपने परिवार के लिए जीविका का साधन जुटाते हैं । इस स्थिति से बाहर आने हेतु ठोस कार्यवाही की जरूरत है और एैसी कार्यवाही अभी ही करनी है ।

दुर्घटनाओं से निदान के लिए पूर्णतया सरकार पर ही निर्भर नहीं रहा जा सकता है । सडकों को सही हालत में रखना, सडक पर उचित प्रकार से लाइनिंग डालना नियम बनाना एवं दण्डात्मक कार्यवाही करना आदि काम सरकार के जिम्मे है लेकिन सडक नियमों का पालन करना हर एक सडक उपयोग कर्ता के उपर ही निर्भर करता है । नियमों का पालन न करने पर दण्डाम्मक कार्यवाही तो तभी अमल में लाई जा सकेगी जब दुर्घटना घटित हो जाय । हमारे प्रयास तो वह होने चाहिए कि जिससे दुर्घटनायें हो ही नहीं । दुर्घटना के बाद तो जिन्दगी या अपंगता को बचाना मात्र ईष्वर के हाथ ही रह जाता है । नियमों का पालन न करने वाले को दण्ड देने मात्र से ना ही तो किसी की जिन्दगी को वापस नहीं लाया जा सकता है और ना ही किसी की अपंगता को दूर किया जा सकता है ।

अतः आवष्यक है कि लोगों को सुरक्षित रूप से सडक का उपयोग करने हेतु सडक नियमों का ज्ञान हो एवं उनमें नियमों क। पालन करने की आदत का विकास हो । आज हम देखते हैं कि सरकारी एजेन्सियों की चैकिंग के डर से हैल्मैट व सीट बैल्ट लगाई जाती है और वाहन की गति को भी निर्धारित गति तक ही चलाया जाता है । लेकिन जैसे ही यह लगता है कि अब कोई चैकिंग पार्टी नहीं मिलने वाली है (जैसे हाइवेज पर) तो लोग किसी भी नियम कायदे की पर्वाह न करते हुए मन मर्जी से वाहन चलाते हैं जो दुर्घटना एक बडा कारण है । इस प्रकार सरकार के बनाए गए नियमों एवं दण्डात्मक कार्यवाही का कोई मतलब नहीं रह जाता है ।

अतः आवष्यकता है एैसी स्वयं सेवी संस्थओं की जो लोगों के बीच जाकर उन्हे दुर्घटना की भयावहता से अवगत करवाए । उन्हे जन मानस के मन में यह भावना जगानी होगी कि सडक नियमों का पालन केरके ही वह सडक पर अपने आपके व अन्य के जीवन को सुरक्षित रख सकते हैं ।

स्वयंसेवी संस्थाओं का समाज से जमीनी जुडाव होता है । वह समाज के लोगों की मनोदषा को ज्यादा अच्छी तरह समझ सकती हैं एवं लोगों को उनकी स्थानिय भाशा में बेहतर तरीके से समझा सकती हैं । स्वयंसेवी संस्थाऐं सरकार व स्थानिय लोगों के बीच की एक कडी बन सकती हैं जो समाज की अवष्यकताओं पर सरकार का ध्यान दिला कर उनकी पूर्ती करवा सकती है । ये संस्थाऐं असंगठित समाज हेतु एक संगठन के रूप में कार्य कर सकती हैं ।

 

—Ravindra Sharma
District Transport Officer (Retd.)
Project Director &  Sr. Vice President, TDPSRSA
+91-9414210099